पत्थर तक सीमित समझ रखी, पहचाने मोल न हीरों के। पत्थर तक सीमित समझ रखी, पहचाने मोल न हीरों के।
ये नहीं साथ छोड़ती है हमारा कभी हम ही हैं जो बहकर भूल जाते हैं! ये नहीं साथ छोड़ती है हमारा कभी हम ही हैं जो बहकर भूल जाते हैं!
मन न माने तेरी बात तो कुछ लालच दे इसे बहलाया करो मन न माने तेरी बात तो कुछ लालच दे इसे बहलाया करो
इच्छा रूपी नगरी का मन राजा है जो बहुत संवेदनशील है। इच्छा रूपी नगरी का मन राजा है जो बहुत संवेदनशील है।
मन के लालच की कैद से कैसे सजा मिलती है और सच का साथ देने से कैसे शीश उपर उठता है...!!! मन के लालच की कैद से कैसे सजा मिलती है और सच का साथ देने से कैसे शीश उपर उठता है...
गाने बन गए, मूवी बन गई; कितने सरकारी, उससे भी ज्यादा गैर-सरकारी प्रोजेक्ट बन गए... गाने बन गए, मूवी बन गई; कितने सरकारी, उससे भी ज्यादा गैर-सरकारी प्रोजेक्ट बन गए...